Lesbian Nanad Bhabhi
हैलो मेरे सभी प्यारे दोस्तों, मैं पायल आज अपनी गोरी और चिकनी चूत पूरी खोलकर आप सबका दिल और चूत खोलकर बहुत-बहुत स्वागत करती हूँ। अपनी यह पहली सेक्स स्टोरी में, यह सेक्स कहानी लिखने में मैंने आज ही सोची है।
और मेरी लाइफ़ के ये फ़ंडा हैं, कि जो सोच लिया। वो जितनी जल्दी हो सके, उसे कर लो। क्योंकि क्या पता कुछ पलों बाद आपका मूड चेंज हो जाए। इसलिए मैंने अभी कुछ टाइम पहले यह कहानी लिखने की सोची, और मैं अब आपके लिए लिख रही हूँ।
दरअसल बात ये है, कि मैंने अभी तक इंटरनेट पर एक लेस्बियन्स की कहानी पढ़ी। जिसे पढ़कर मेरी चूत में खुजली होने लग गई। ओह दोस्तों मुझे माफ़ करना मैं आपको अपने बारे में बताना तो भूल ही गई। मेरा नाम पायल है, मेरी उम्र आज 24 साल है।
आज की डेट में मेरी शादी हो चुकी है, और मेरा एक साल का लड़का भी है। मैं दिखने में एक परफ़ेक्ट वाइफ़ हूँ। मेरा फ़िगर 34-28-34 है, जो मेरे पति को बहुत ही पसंद है। मैं वैसे तो पतली-सी हूँ। जिस वजह से मैं दिखने में और भी सेक्सी लगती हूँ।
आज की जो मैं कहानी बताने जा रही हूँ। वो मेरे पहले सेक्स की है। ज़्यादातर लड़कियाँ अपना पहला सेक्स किसी लड़के या एक मर्द के साथ करती हैं। पर मेरे साथ थोड़ा अलग हुआ, मेरा पहला सेक्स एक औरत के साथ हुआ। आप ऐसे भी कह सकते हो, कि मेरा पहला सेक्स एक लेस्बियन सेक्स था।
यह सेक्स मैं किसी और के साथ नहीं बल्कि अपनी सगी भाभी के साथ किया था। यह बात आज से 4 साल पहले की है, जब मैं 20 की हुआ करती थी। उस टाइम मेरा फ़िगर 32-26-32 ही हुआ करता था। मैं उस टाइम कॉलेज में एम.ए. कर रही थी।
मेरे घर मैं और मेरे पापा और मेरे बड़े भैया और भाभी रहती थीं। भैया की शादी को 3 साल हो चुके थे। दूसरे साल में उन्हें एक लड़का हुआ था। भैया का अपना काम था, इसलिए वे अपने काम के चक्कर में दिल्ली जाया करते थे। मेरी और भाभी की बहुत बनती थी।
भाभी मुझे अपनी छोटी बहन ही मानती थीं। और हम दोनों हर तरह की बातें होती थीं। पर मैं अभी भी भाभी से सेक्स की बातें करते हुए, शरमाती थी। पर मैं और भाभी एक-दूसरे के सामने अपने कपड़े चेंज कर लेती थीं।
क्योंकि जब भाभी माँ बनी थीं, तो मैंने ही उनके कपड़े चेंज किए थे। इसलिए हम दोनों की शर्म दूर हो गई थी। एक बार की बात है, मम्मी-पापा किसी दूर रिश्तेदारों में गए हुए थे। उधर से भैया को अपनी शॉप का सामान लाने के लिए दिल्ली जाना पड़ गया।
भैया दोपहर को घर से निकल गए, मैं जब कॉलेज से घर वापस आई। तब मुझे भाभी ने भैया के जाने के बारे में बताया। अब घर पर मैं और भाभी और एक उनका छोटा-सा एक साल का लड़का था। उन दिनों गर्मियों के दिन थे। इसलिए रात को डिनर के बाद भाभी ने कहा कि चलो आज हम ऊपर छत पर मच्छरदानी में ही सो जाते हैं। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं भाभी की बात मान गई, फिर मैंने छत के ऊपर अपना और भाभी का बिस्तर लगा लिया। ऊपर बहुत ही अच्छी हवा चल रही थी। फिर जब भाभी अपने बच्चे को ऊपर लेकर आईं। और उन्होंने दो बिस्तर देखे तो वह बोलीं।
भाभी – अरे पायल ये तू क्या कर रही है, आज तू मेरे साथ मेरे ही बिस्तर पर सो जाओ। खुले में तुझे मच्छर खा जाएँगे, इधर मेरे पास आजा।
मैं – नहीं भाभी आपके साथ मुन्ना भी तो है?
भाभी – अरे तो क्या हुआ, अगर तेरे भैया होते। तो वे भी तो मेरे साथ ही सोते। चल अब आजा ज़्यादा नाटक मत कर।
मैं – ठीक है भाभी आती हूँ।
Lesbian Nanad Bhabhi Sex Kahani
फिर मैं भाभी के बिस्तर पर मच्छरदानी के बीच में आ गई। मुन्ना हम दोनों के बीच में लेटा हुआ था। वह अभी सोया नहीं था, इसलिए भाभी उसे अपना एक बूब्स बाहर निकालकर अपना दूध पिला रही थीं। मैंने भाभी के गोरे और मोटे नंगे बूब्स को देख रही थी। हम दोनों ने एक-दूसरे को ऊपर से नंगा काफ़ी बार देखा है। इसलिए मुझे शरमाने की कोई ज़रूरत नहीं थी।
पर मैंने जब भाभी के दूसरे बूब्स को भी बाहर निकाले देखा तो उससे मेरी नज़र नहीं हटी। क्योंकि भाभी के बूब्स मेरे बूब्स से काफ़ी बड़े और मोटे थे। उनके नंगे बूब्स को देखकर मेरे मुँह में पानी आ रहा था। ऊपर से उनके ब्राउन कलर के निप्पल्स में से दूध निकल रहा था।
मैं – भाभी आपके बूब्स में दूध निकल रहा है?
भाभी – क्या क्यों पायल मेरा दूध ज़्यादा बनता है, और ये बेचारा इतना पी नहीं पाता। अब भला मैं क्या करूँ?
मैं – हाय इतना सारा दूध फिर सबका वेस्ट होता है?
भाभी – अरे पागल इतना दूध किसी-किसी का बनता है। और ये वेस्ट नहीं होता।
मैं – भाभी अभी वेस्ट ही तो हो रहा है ना?
भाभी – नहीं होता, अगर तेरे भैया होते यहाँ। मैं उन दोनों को एक साथ दूध पिलाती हूँ। और अगर वे नहीं होते तो मैं खुद अपना दूध पी लेती हूँ।
मैं भाभी की ये बात सुनकर उनकी बातों में खो गई। क्योंकि अब मेरी नज़र उनके बूब्स के निप्पल्स से टपकते हुए दूध पर थी। शायद भाभी की नज़रें पढ़ चुकी थीं, और फिर वह बोलीं।
भाभी – तूने मेरा दूध पीना है?
भाभी ने मेरे मन की बात बोली और फिर मैं बोली – हाँ भाभी अब आपके दूध को देखकर मेरा भी मन दूध पीने का होने लग गया है।
भाभी – अच्छा जी फिर मैंने तुझे मना कब किया है, आजा पी ले।
ये सुनकर मेरे चेहरे पर ख़ुशी की स्माइल आ गई। मैं धीरे से आगे हुई, और अपने मुँह में मैंने उनका निप्पल लिया। और धीरे-धीरे उनके बूब्स में से दूध पीने लग गई। मुझे दूध का स्वाद थोड़ा-सा अजीब-सा लगा, पर मुझे दूध पीने में बहुत मज़ा आ रहा था। क़रीब दो मिनट बाद ही भाभी के मुँह से आह आह की सिसकारियों की आवाज़ आने लग गई। भाभी अपने हाथों से मेरे बालों को सहलाने लग गईं।
मैं – भाभी आपको क्या हुआ, आपके मुँह से सी सी की आवाज़ें क्यों निकल रही हैं?
भाभी – पायल लगता है, तूने कभी अपने बूब्स किसी से चुसवाए नहीं हैं?
मैं – हाँ आप सही कह रही हो, मेरे बूब्स अभी तक किसी ने अच्छे से दबाके तक नहीं हैं। और आप चूसने की बात कर रही हो।
भाभी – तभी तो तुझे इस मज़े के बारे में पता नहीं है।
इससे पहले मैं कुछ बोलती, भाभी ने अपनी नाइटी पूरी तरह से उतार दी और अब वह सिर्फ़ अपनी पैंटी में ही रह गई थीं। मुन्ना अभी तक सो गया था, भाभी मेरी ओर आगे हो गईं और बोलीं।
भाभी – ले अब आराम से दोनों चूस बारी-बारी से।
मैं भाभी के दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूसने लग गई, पर मुन्ना हम दोनों के बीच में लेटा हुआ था। इसलिए मुझे भाभी के बूब्स चूसने में काफ़ी दिक़्क़त हो रही थी। मेरी तकलीफ़ को देखते हुए भाभी ने मुन्ने को दूसरी तरफ़ कर दिया। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अब वह मेरे पास आकर मुझसे लिपटकर लेट गईं। अब मैं बड़े आराम से भाभी के ऊपर आकर उनके बूब्स को चूस रही थी। क़रीब 10 मिनट में ही मैंने उनके दोनों बूब्स अच्छे से चूस-चूसकर खाली कर दिए थे। फिर भाभी धीरे से मेरे कान में बोलीं – क्या मैं भी तुम्हारे बूब्स चूस सकती हूँ।
मैं – भाभी यहाँ?
भाभी – हाँ यहाँ इसके अंदर क्या हो रहा है, बाहर कुछ नहीं पता चलता। चल अब अपना कुर्ता निकाल दे।
मैंने अपना कुर्ता निकाल दिया, भाभी ने मेरी ब्रा को खोल दी। अब वह मेरे बूब्स को चूसने लग गईं। मैं एकदम गरम हो गई और मेरे मुँह से अपने आप आह आह्ह की आवाज़ें आने लग गईं। फिर भाभी मेरे दोनों निप्पल्स को अपने दाँतों से काटकर बोलीं।
भाभी – पायल तूने कभी किस किया है?
मैं – नहीं भाभी।
भाभी – कोई बात नहीं, चल फिर आज करते हैं।
Free Lesbian Chudai Story
ये कहते ही भाभी ने अपने होंठ मेरे होंठों के ऊपर रखे और मेरे होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लग गईं। हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लग गए थे। किस करते-करते हुए उनके हाथ मेरी सलवार के पास पहुँच गए, मैंने नीचे पैंटी नहीं डाली थी। भाभी का हाथ जैसे ही मेरी चूत पर गया तो वह बोलीं।
भाभी – तूने पैंटी नहीं डाली?
मैं – नहीं भाभी।
भाभी – गुड वेरी गुड, चल अब अपनी सलवार उतार दे।
मैं – पर क्यों भाभी?
भाभी – तुझे आज मैं जन्नत की सैर करवाती हूँ। तू चुपचाप मज़े ले सिर्फ़।
ये कहते ही भाभी ने मेरी सलवार का नाड़ा पकड़कर खोल दिया। फिर उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों में लिया और मेरी सलवार को भी मुझसे अलग कर दिया। फिर भाभी ने मेरी चूत पर अपना हाथ चलाना शुरू कर दिया, मैं पागल होने लग गई। वह मेरी चूत में अपनी उँगलियाँ डालने लग गईं, जब मैं ज़्यादा पागल होने लगी। तो भाभी रुकीं और अपनी नाइटी और पैंटी उतार उन्होंने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया।
भाभी – चल अब अपनी चूत मेरे मुँह पर रख और अपना मुँह मेरी चूत पर रख।
मैं – पर।
भाभी – पर वर कुछ नहीं, जो मैं कह रही हूँ। बस तू वैसे ही कर समझी।
मैं चुपचाप वो करने लग गई, जो मुझे भाभी करने के लिए कह रही थीं। मेरी चूत अब भाभी के मुँह पर थी, और ऐसे ही उनके ऊपर झुककर उनकी चूत को सूँघ रही थी। फिर भाभी ने मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। उनके चूत चाटने से मेरे पूरे जिस्म में करंट-सा चलने लग गया।
फिर भाभी ने जीभ मेरी चूत में डाल दी, और वह मेरी चूत को अंदर से चोदने लग गईं। मैं भी अब दीवानी-सी होने लग गई थी, मैंने भी अब भाभी की चूत पर अपना सिर रखा और उनके चूत के बड़े से दाने को मैंने अपने होंठों में कर। ज़ोर-ज़ोर से चूसने लग गई। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे ऐसा करने से भाभी भी पागल हो गईं, अब वह खुद नीचे से अपनी गाँड़ उठा-उठाकर मुझसे अपनी चूत चटवाने लग गईं। फिर मैंने अपनी दो उँगलियाँ भाभी की चूत में डाल दीं, और भाभी ने भी एक उँगली मेरी चूत में डाल दी। और अपना अँगूठा मेरी गाँड़ के छेद में डाल दिया। वह दोनों ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करने लग गईं।
साथ ही भाभी मेरी चूत में अपनी जीभ भी डाल रही थीं। तभी अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड़-सा गया, मुझे ऐसा लगा। कि मानो मेरी जान अभी मेरी चूत में से निकलने वाली है। तभी पानी की तेज़ धार मेरी चूत में से निकलकर सीधी भाभी के चेहरे पर गिर गई। भाभी मेरी चूत को चाट-चाटकर साफ़ करने लग गईं। फिर मैं भाभी के ऊपर अधमरी-सी लेट गई। क़रीब 5 मिनट रेस्ट करने के बाद भाभी मुझसे बोलीं।
भाभी – अय पायल तूने तो अपना पानी निकाल लिया, अब मेरा कौन निकालेगा।
मैं – भाभी मैं हूँ ना, मैं आपका पानी निकालती हूँ।
भाभी – हाँ मेरी बहनो निकाल दे प्लीज़।
फिर मैं भाभी की दोनों टाँगों के बीच में आ गई। फिर मैंने पहले भाभी की पूरी चूत को अच्छे से अपनी जीभ से चूसा। और फिर अपने हाथ की चारों उँगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं। और ऊपर से उनकी चूत के दाने को अपने होंठों में लेकर चूसने लग गई।
इससे भाभी पागल हो गईं, और अपनी गाँड़ उठा-उठाकर मुझसे अपनी चूत चुदवाने और चुसवाने लग गईं। कुछ ही देर में भाभी की चूत में से पानी निकल गया, जिसे मैं चाट-चाटकर सारा पी गई। भाभी की चूत का पानी भाभी के दूध से भी ज़्यादा स्वादिष्ट था। जिसे मैं अंदर तक चाट-चाटकर पी रही थी।
दोस्तों उस रात के बाद मैं भाभी की दीवानी बन गई थी। अब हम दोनों जब भी मौका मिलता था। तभी एक-दूसरे की चूत को चाटकर शांत करते थे। फिर मेरी शादी हो गई, पर शादी के बाद भी हम दोनों भाभी और ननद आज भी लेस्बियन सेक्स करते हैं। क्योंकि सेक्स का असली मज़ा ही इस सेक्स के अंदर है, मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी ये सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी।
इसे भी पढ़े – मामी की चूत चोदकर दिवाली मनाई
ये Lesbian Nanad Bhabhi की कहानी आपको कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताये…
[…] इसे भी पढ़े – ननद की चूत में ऊँगली डालने लगी भाभी […]