Bhai Bahan First Chudai
यह हिंदी भाई बहन सेक्स कहानी की कहानी तब की है, जब मेरी बहन कुसुम का दिल्ली में मेडिकल का एग्ज़ाम था। ये दोनों एग्ज़ाम दो दिन रेगुलर एक ही सेंटर पर थे। पापा के पास टाइम नहीं था तो एग्ज़ाम दिलवाने जाने के लिए पापा ने मुझे जाने को कह दिया।
मैंने पापा को जाने के लिए हाँ बोल दिया, तो पापा ने मुझे दो दिन बाद बस का टिकट दे दिया। एक ही कम्पार्टमेंट में डबल सीट का था, रात के आठ बजे बस था। पापा हमें बस स्टैंड तक छोड़ने के लिए बाइक पर आए थे। मैं बीच में था और कुसुम मेरे पीछे बैठी थी।
जिस कारण ब्रेक लगाते ही कुसुम के बूब्स मेरे पीछे लग जाते थे। जिससे मुझे एक कुछ अलग तरह की फीलिंग और गलत-गलत ख़्याल आने लगते थे। उस टाइम वो ब्लू कलर का सूट और लेगिंग्स पजामा पहनी थी, और वो गोरी होने के कारण और भी सुंदर और सेक्सी लग रही थी।
मेरा लंड अब खड़ा हो चुका था, पर कुछ किया भी तो नहीं जा सकता था। ख़ैर जो भी हो, कुछ देर बाद बस चलने लग गई, और कुछ टाइम पास के लिए हम दोनों इधर-उधर की बात करने लग गए। उसके बाद वो सोने लग गई, मैं भी मूवी देखने लग गया।
फिर कब सोए कुछ पता ही नहीं चला। उस दिन कुछ ख़ास नहीं रहा, और अगले दिन मॉर्निंग में हम गया पहुँच गए। फिर हम होटल में गए और वहाँ फ्रेश हुए। फिर मैं उसे एग्ज़ाम दिलवाने चला गया। दिन तो ऐसे ही कट गया था। एग्ज़ाम के बाद इवनिंग में घूमते हुए हमें रात के नौ बज गए थे।
फिर हम दोनों होटल पहुँचे, उसमें एक ही डबल बेड फोल्डिंग था। कुछ देर पढ़ने के बाद वो सोने लग गई। मैं भी मोबाइल बंद करके सो गया। लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं कुसुम के पीछे से उसके पैर को टच करने लग गया। फिर कुछ देर बाद मैं उससे चिपक गया, और अपने हाथ से उसके जाँघ को ऊपर से ही सहलाने लग गया। तब वो गुस्से से बोली—
Bhai Bahan First Chudai Kahani
कुसुम – ऐसे क्या कर रहे हो, मेरा कल एग्ज़ाम है तो मुझे कल जल्दी उठना है।
मैं – मुझे भी तो उठना है लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही है।
कुसुम – तो मैं क्या करूँ? मुझे सोने दो।
मैं – तुम ही कुछ कर सकती हो।
कुसुम – क्या, मैं क्या कर सकती हूँ?
मैं – कुछ नहीं बस ऐसे ही, आज तुम बहुत हॉट लग रही थी जीन्स टॉप में।
कुसुम मुस्कुराते हुए बोली – इसीलिए आपको नींद नहीं आ रही है?
कुसुम समझ गई कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।
मैं – ऐसा नहीं है, रियली आज तुम बहुत सुंदर लग रही थी।
कुसुम – वो तो मैं हूँ ही, आप भी तो हैंडसम हैं।
अब बातों ही बातों में हम भाई-बहन गरम होने लगे थे।
मैं – फिर भी कोई फ़ायदा नहीं।
कुसुम – कोई फ़ायदा नहीं मतलब?
मैं – मतलब ऐसे ही, कोई मिलती ही नहीं टाइमपास के लिए।
कुसुम – ओह, ऐसा है, अब मैं समझी।
मैं – क्या?
कुसुम – यही कि आपको टाइमपास के लिए गर्लफ्रेंड चाहिए।
मैं – तुम्हारा भी तो कोई बॉयफ्रेंड होगा?
कुसुम – नहीं तो, मुझे इंटरेस्ट नहीं है।
मैं – क्यों? आजकल तो ये सब नॉर्मल है।
कुसुम – मैं इस सब से दूर रहती हूँ।
मैं – पर क्यों? ऐसी कोई तो बात होगी?
कुसुम – हाँ, मुझे डर लगता है, किसी को पता लग गया, या कोई देख ले तो क्या सोचेगा?
मैं – हाँ ये बात तो सही है, हम भी ऐसे ही हैं।
कुसुम – आप क्यों डरते हो, लड़का लोग के तो बहुत फ़र्क़ हैं।
मैं – फ़र्क़ है, लेकिन कोई मिलती ही नहीं है।
कुसुम – तो पहले आप ही ट्राई करो।
मैं – फर्स्ट टाइम मुझे बहुत डर लगता है।
कुसुम – तब तो आपको कभी नहीं मिलेगी, इसके लिए थोड़ा रिस्क तो लेना पड़ेगा।
मैं – यही तो प्रॉब्लम है, कि हम रिस्क नहीं ले सकते।
कुसुम – तो फिर ऐसे ही रहिए।
मैं – तुम भी तो रिस्क नहीं ले सकती।
कुसुम – हाँ तो फिर मुझे इंटरेस्ट भी तो नहीं है।
मैं – मुझे इंटरेस्ट है तो तुम हेल्प नहीं कर सकती हो?
कुसुम – मैं… मैं मतलब, मैं क्या हेल्प कर सकती हूँ?
मैं – मेरा मतलब, तुम मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ।
कुसुम – आपका दिमाग़ ठीक तो है ना? मैं कैसे? मैं आपकी बहन हूँ।
मैं – तो क्या हुआ, तुम एक लड़की भी तो हो ना।
कुसुम – भी भैया, ये गलत बात है।
मैं – कुछ नहीं गलत है, तुमको बॉयफ्रेंड और हमें गर्लफ्रेंड चाहिए। हम भाई-बहन हैं तो क्या हुआ, एक लड़का-लड़की भी तो हैं।
कुसुम – ये सब ठीक है लेकिन, एक भाई-बहन ऐसा कैसे कर सकते हैं?
मैं – कुसुम मेरी बात समझो, ये सब बाहर नहीं कर सकते। क्योंकि रिस्क लेने से हम दोनों भाई-बहन डरते हैं।
पर हम दोनों आपस में करें तो कोई रिस्क नहीं है, घर की बात घर में और भाई-बहन हैं तो कोई शक भी नहीं करेगा। हम दोनों मिलकर एन्जॉय भी करेंगे भाई-बहन भी रहेंगे।
बहुत प्रयास किए समझाने, मनाने का तब देर से वो समझी।
कुसुम मुस्कुराते हुए बोली – भैया ऐसा मैं मानती हूँ, आपकी बात ठीक है लेकिन कोई प्रॉब्लम हुई तो?
मैं भी मुस्कुराते हुए बोला – कोई प्रॉब्लम नहीं होगी मेरी जान, अपने भैया पर भरोसा तो रखो बस।
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हम दोनों पहले से बातों ही बातों में गरम हो चुके थे। सिर्फ़ कुसुम की तरफ़ से हाँ का इंतज़ार था। जैसे ही मुझे सिग्नल मिला, तो मैं उससे लिपट गया और लिप्स पर किस करते हुए उसके ऊपर अपने हाथ से बूब्स को प्रेस करने लग गया।
अब मैं कपड़े के ऊपर से ही उसके पूरे जिस्म को सहला रहा था। कुछ देर बाद कुसुम भी मुझे अपनी बाहों में पूरी तरह से लपेटकर, मेरे बाल और मेरी पीठ को सहलाने लग गई। इस तरह क़रीब पंद्रह मिनट तक करने के बाद नॉर्मल वो हो गई। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं – क्या हुआ?
कुसुम – मेरा वो निकल गया।
फिर वो बाथरूम गई और हम दोनों फ्रेश होकर सो गए, क्योंकि मॉर्निंग में उठना भी तो था। उस टाइम क़रीब बारह बज पच्चीस मिनट हुए थे। मॉर्निंग में हम लेट उठे और फिर हम फ्रेश होकर एग्ज़ाम सेंटर पर पहुँच गए। एग्ज़ाम के बाद दिन में थोड़ा घूमे, और मार्केटिंग से शॉपिंग करके हम फिर से होटल में आ गए।
होटल में रेस्ट करके हम इवनिंग में वापस गोरखपुर के लिए बस में बैठ गए। जब बस में गए तो हमारी सीट स्लीपर कम्पार्टमेंट में थी। तो वहाँ किसी तरह का कोई प्रॉब्लम भी नहीं थी। वहाँ पर्दे भी लगे हुए थे। मैं खिड़की को ओपन करके पास में ही लेट गया।
मेरी बहन सीधा पैर फैलाकर बैठ गई। उस टाइम कुसुम ने सूट और हाफ़ लेगिंग्स पहनी थी। बस चलने के कुछ देर बाद कुसुम भी लेट गई, तो मैं अपने पैर से उसके पैर को रगड़ने लग गया और हाथ को उसके पेट के ऊपर से सहलाने लग गया। कुसुम समझ गई कि मैं क्या कर रहा हूँ।
कुसुम – क्या भैया फिर स्टार्ट हो गए? कुछ टाइम और सब्र किया करो।
मैं – कुछ टाइम क्यों, उसके बाद क्या है?
कुसुम – उसके बाद जो आपका मन करे।
मैं – मेरा मन तो अभी कर रहा, तुम्हारे मन का क्या?
कुसुम – मेरा मन भी करता है, बट अभी नहीं।
मैं – क्यों?
कुसुम – अभी कैसे हो सकता है, यहाँ कब कोई पर्दा हटा दे और कपड़े भी ख़राब हो जाएँगे।
मैं – हाँ, यहाँ रिस्क तो है।
लेकिन हम भाई-बहन बातों ही बातों में इतना गरम हो गए थे, कि दोनों एक-दूसरे से लिपटकर लिप्स किस करने लग गए। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे में इतना खो गए कि कुछ पता ही नहीं चला, कि उसके पैंटी के अंदर मैंने कब हाथ डाल दिया।
अब मैं उसकी चूत को मसलने लग गया। कुसुम भी मेरे जीन्स के अंदर से लंड को सहला रही थी। कुसुम की चूत एकदम टाइट थी, इसलिए मेरी उंगली भी सही से अंदर नहीं जा रही थी। दर्द से उसके आवाज़ निकलने लग गई।
अब कुसुम भी मेरे लंड को जीन्स से बाहर निकालकर आगे-पीछे करके मुठ मारने लग गई। मैं भी धीरे-धीरे उंगली को उसकी चूत में अंदर-बाहर करने लग गया। इस तरह करने से कुछ देर बाद दोनों का स्पर्म निकल गया, और दोनों निढाल हो गए।
रुमाल से हम दोनों ने स्पर्म को साफ़ किया और अपने-अपने कपड़े ठीक किए। उस टाइम बारह बज चालीस मिनट हो गया था। कुछ टाइम बाद एक स्टॉप पर पंद्रह मिनट के लिए बस रुकी, सभी यात्री टॉयलेट्स, फ्रेश होने के लिए नीचे उतर गए।
फिर उसके बाद हम दोनों की आँख लग गई। मॉर्निंग में पाँच बजे मैंने कुसुम को उठाया। उसने मुझे देखा और मुझे किस कर लिया। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए, और कुछ देर में गोरखपुर बस स्टॉप से ऑटो लेकर हम घर आ गए। घर पर हम फ्रेश हुए, पापा ड्यूटी, भाई क्लास जा रहा था।
घर पर माँ, दादी, मैं और कुसुम थे। मेरे घर में नीचे चार, ऊपर तीन रूम हैं। मैं और कुसुम छत पर अकेले अपने रूम में थे, तब मुझसे रहा नहीं गया। मैं कुसुम के रूम में गया, तो वो सफ़ाई कर रही थी। मुझे देखकर मुस्कुराते हुए वो बोली।
कुसुम – क्या हुआ भैया?
मैं – कुछ भी नहीं, मेरा रूम भी साफ़ करना है।
कुसुम – ठीक हो जाएगा, और कुछ?
मैं – हाँ।
कुसुम – क्या?
मैंने पीछे से उसके बूब्स को दबा दिए और मैं बोला – ये।
कुसुम डर गई, और वो बोली – भैया तुम पागल हो, माँ घर में ही है। कोई देख लेगा तो?
मैं – सॉरी, लेकिन मैं क्या करूँ?
कुसुम – इंतज़ार करो, आज दिन भर मुझे काम है। मुझे टाइम मिलेगा तो मैं आ जाऊँगी।
मैं – भाई आएगा तब सो जाना, रात में तो टाइम रहेगा ना?
फिर हम सो गए, बहन भी काम करने के बाद सो गई। फिर जैसे-तैसे शाम हो गई। तब तक कुसुम सो रही थी, मैंने उसे जगाया और उसे मैंने मार्केट चलने को कहा।
कुसुम – माँ गुस्सा करेगी।
मैं – माँ को बोलना कुछ शॉपिंग करनी है।
फिर हम रेडी हो गए और कुसुम माँ से बोली – माँ मैं मार्केट जा रही हूँ भैया के साथ, मुझे कुछ शॉपिंग करनी है।
माँ – ठीक है, जल्दी आना।
कुसुम – मुझे मार्केट क्यों लाए हो?
मैं – ऐसे ही घूमने के लिए।
कुसुम – राजा भैया को आज मुझ पर इतना प्यार क्यों आ रहा है?
मैं – रानी बहन को पता है क्यों प्यार आ रहा है।
कुसुम – सिर्फ़ प्यार ही आ रहा है या प्यार करने का भी कोई प्लान है?
मैं – प्यार करने का प्लान सेट है।
कुसुम – क्या सच में? कब है?
मैं – रात में।
कुसुम – रात में कैसे होगा?
मैं – डिनर के बाद सब सो जाएँगे, तब बारह बजे तुमको मेरे रूम में आना है।
कुसुम – गौरव का क्या?
मैं – बारह बजे तक गौरव पढ़ाई करके सो जाता है, सोने के बाद गौरव दो आवर्स तक नहीं जागेगा।
कुसुम – किसी वजह से जाग गया तो?
मैं – तुम इतनी डरती क्यों हो? गौरव दिन में नहीं सोता है, रात में भी वो लेट सोता है। इसलिए वो इतना जल्दी नहीं जागेगा।
कुसुम – मुझे डर लगता है, कहीं कुछ हो गया तो?
मैं – कुछ नहीं होगा, आजकल सेफ़्टी के लिए मार्केट में सब कुछ मिलता है।
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अब बात करते हुए हम मार्केट में आ गए थे। शॉपिंग करके हम वापस घर जाने लगे, तब एक दुकान से मैंने आई-पिल की टैबलेट और कुछ कंडोम ले लिए। घर पर कुसुम मम्मी की खाना बनाने में हेल्प करने लग गई। अब रात के साढ़े दस बजे तक सब डिनर करके टीवी देख रहे थे।
धीरे-धीरे सब सोने चले गए। मैंने सवा बारह बजे टीवी बंद किए और अपने रूम में देखा तो भाई सो रहा था। अब कोई प्रॉब्लम भी नहीं थी। कुसुम के बेडरूम में गए, तो लाइट ऑन करते ही, क्या नज़ारा था। उस टाइम वो रेड टी-शर्ट, ब्लैक ट्राउज़र्स में एकदम हॉट लग रही थी और बेड पर लेटी हुई मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।
मैं भी बनियान और ब्लू पैंट पहने हुए था। हम भी मुस्कुराते हुए बेड पर लेट गए, और कुसुम को मैंने बाहों में भरकर लिप्स किस करना शुरू कर दिया। कुसुम भी शायद इसी का इंतज़ार कर रही थी। उसने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया और फुल सपोर्ट करने लग गई। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के कपड़े उतारने लग गए। मैं अंडरवियर में और कुसुम व्हाइट ब्रा, ब्लैक पैंटी में थी। अब मैं कुसुम के पूरे जिस्म को चूमने लग गया। कुसुम भी मेरे जिस्म को चूम और लंड को पूरी तरह मसल रही थी।
फिर मैं उसकी ब्रा को खोलने लग गया, और उसके दोनों बूब्स को मैं बारी-बारी से मुँह में लेकर चूसने लग गया। अब कुसुम के मुँह से आह-आह की आवाज़ें निकल रही थीं। और मैं उसकी चूत में उंगली डालकर अंदर-बाहर कर रहा था।
मेरा लंड भी एकदम लोहे के रॉड जैसा कठोर और छह इंच लंबा खड़ा हो गया था। कुसुम एक बार अपना कामरस मेरे हाथ पर निकाल चुकी थी। अब मैंने अपना अंडरवियर निकाला और कुसुम की पैंटी को निकालकर मैंने उसे भी नंगी कर दिया।
कुसुम की चूत एकदम गुलाबी और उस पर हल्के छोटे रेशम जैसे बाल थे। कसम से वो बहुत गज़ब की चूत लग रही थी। अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा था। मैंने कुसुम के पैर को फैलाया और अपना लंड उसके चूत पर सेट किया, और लंड को चूत पर ऊपर-नीचे रगड़ने लग गया।
फिर मैंने एक हल्का सा शॉट मारा और लंड का टोपा ही अंदर घुस गया। इससे कुसुम को दर्द होने लग गया। फिर दूसरे शॉट मारा तब पूरा लंड अंदर घुस गया और कुसुम की दर्द से चीख निकल गई। अब धीरे-धीरे हम चुदाई करने लग गए।
कुछ देर बाद जब मैंने स्पीड तेज़ करी, तो कुसुम के मुँह से आह-आह भैया और ज़ोर से और ज़ोर से ऐसी आवाज़ें निकलने लग गईं। क़रीब तीस मिनट तक लगातार चुदाई करने के बाद स्पर्म उसके चूत में मैंने डाल दिया।
कुसुम भी अपना कामरस छोड़ चुकी थी। मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा और कुछ देर बाद होश आया तो देखा बेडशीट पर स्पर्म और खून लग गया था। मैंने उसको साफ़ किया, और हम अपने कपड़े पहनने लग गए। कुसुम को मैंने लंबा हग और किस किया। फिर मैं अपने रूम में सोने चला गया। तब टाइम सवा दो हो रहा था, और मॉर्निंग में आठ बजे उठा। मैंने देखा कि कुसुम बेडशीट धो रही थी।
वहाँ कोई नहीं था इसलिए मैं उसको देखकर मुस्कुराते हुए बोला – रात को बॉयफ्रेंड के साथ मज़ा आया?
कुसुम भी मुस्कुराते हुए बोली – मज़ा बॉयफ्रेंड को आता है और साफ़ मुझे करनी पड़ती है।
मैं – तुझे मज़ा आया या नहीं?
कुसुम – मज़ा तो बहुत आया लेकिन मेरी चूत में दर्द है।
फिर मैंने कुसुम को दर्द की टैबलेट और एक आई-पिल भी दे दी। अब हम दोनों भाई-बहन जब मन करे तब सेक्स एन्जॉय करते हैं। और किसी को कुछ पता भी नहीं चलता है।
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