Jawan Sali Garam XXX Story
मेरा नाम श्लोका है, मैं जब 19 साल की थी, उस टाइम मेरा एडमिशन लखनऊ हुआ था। जीजू ने कोशिश करके करवा दी थी। मैं अपनी बड़ी बहन के यहाँ रहने लग गई थी। उन्होंने मुझे घर के पीछे वाले रूम खाली करवा के मुझे दे दिया था। वह रूम बड़ा और हवादार था। जीजू और दीदी दोनों ही जॉब करते थे।
मेरे जीजू इंजीनियर हैं और दीदी हॉस्पिटल में नर्स हैं। कुछ ही दिनों में जीजू भी मुझसे घुल-मिल गये थे। वह मुझसे छेड़छाड़ भी करते थे। मुझे उन्हें देखकर तरह-तरह के विचार आने लगते थे। जीजू एक जवान आदमी है। मुझे तो वह पहले से ही बहुत ख़ूबसूरत लगते थे।
दीदी को नाइट शिफ़्ट करनी पड़ती थी। जब हम घूमने जाते थे तो जीजू दीदी का हाथ पकड़कर चलते थे। दीदी भी चलते टाइम कभी-कभी जीजू के चूतड़ों को सहला देती थीं। उसे देखकर मुझे भी झुरझुरी होने लगती थी। मेरे मन में भी हलचल होने लगती थी कि कोई मेरे चूतड़ों को भी सहलाए।
वह कभी-कभी मेरा हाथ भी पकड़ लेते थे। मैं भी उनका हाथ नहीं छोड़ती थी। मेरे हाथ काँप जाते थे, जिसे वह महसूस कर लेते थे। कितने ही मौक़ों पर उनका हाथ मेरे बूब्स और चूतड़ों से भी टकरा जाता था। शायद जीजू जान-बूझकर ऐसा करते थे। पर मैं भी जानकर हमेशा अनजान बनी रहती थी।
घर पर रात को मैं उनके रूम के पास छुपकर आती थी और कुछ सुनने की कोशिश करती थी। उस टाइम वे लोग चुदाई में लगे रहते थे। मुझे बाहर उनकी आवाज़ आती थी। मुझे भी चुदवाने में बहुत फ़ीलिंग होने लगती थी। मैं किसी तरह अपने मन को क़ाबू में रख रही थी।
मेरी उत्तेजना बहुत ज़्यादा बढ़ जाती थी। तो मैं उँगली को चूत में डालकर अंदर-बाहर करके अपना पानी निकाल देती थी। हाथ से करते टाइम मैं जीजू के बारे में सोचकर अपना पानी निकाल देती थी। अब जीजू ने मुझे कैसे चोदा यह मैं आपको बताती हूँ।
दीदी की नाइट ड्यूटी थी। घर के पास सर्कल पर हम तीनों दीदी को बाइक पर बस तक छोड़ने गए। दीदी की बस आने पर वह बस में बैठकर चली गईं। उस टाइम बारिश शुरू हो गई थी। हम दोनों पूरी तरह भीग गए थे। वहाँ से भीगते हुए दोनों सीधे घर आ गए। भीगने से हमारे कपड़े जिस्म से चिपक गए थे। घर आकर वह मेरे जिस्म को मज़े से देखने लग गये।
मैं शर्माते हुए बोली – जीजू ऐसे मत देखो। मुझे शर्म आती है।
जीजू ने मुझे एक आँख मारी और मैं झट से अपने रूम में भाग गई। हम दोनों नहाकर फ़्रेश होकर जीजू के रूम में बैठ गए। जीजू ने अलमारी से एक व्हिस्की की बोतल निकाल ली।
जीजू – यार ठंड लग रही है। एक पेग पी लेता हूँ। तुम भी थोड़ी-सी ले लो।
मैं – नहीं नहीं।
मैं उनकी हरकत नोट कर रही थी और मुझे लग रहा था कि आज जीजू मूड में हैं। और आज मेरे पास बहुत अच्छा मौक़ा था उन्हें पटाने का।
फिर जीजू ने धीरे-धीरे दारू पीना शुरू कर दी और वह बोले – श्लोका तुम्हारा कोई बॉयफ़्रेंड है क्या?
मैं – हाँ था पर अभी नहीं है।
जीजू – अच्छा, वह तुम्हारे साथ कुछ करता था?
मैं – धत्त, जीजू मुझे शर्म आती है।
जीजू – अच्छा मत बताओ। ये ले इसे पी लो। इससे तुम्हें थोड़ा-सा अच्छा लगेगा।
मैंने सोचा आज अच्छा मौक़ा है। जीजू समझेंगे कि मैं नशे में हूँ इसलिए मैं ऐसा कर रही हूँ।
मैं – अच्छा जीजू पर थोड़ी-सी देना।
जीजू – वाह यह हुई ना बात। ये लो।
फिर उन्होंने मुझे पेग बनाकर दे दिया। मैं पीने का नाटक कर रही थी। और थोड़ी-सी ड्रिंक मैंने पास में ही नीचे गिरा दी और गिलास मुँह से लगा दिया। कुछ ही देर में जीजू को व्हिस्की चढ़ने लग गई और वह बोले – यार तेरी दीदी तो एकदम मस्त है। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
इससे पहले वह कुछ आगे बोलते, मैंने उन्हें होंठों पर अपनी उँगली रख दी। मैं ऐसे नाटक कर रही थी मानो मैं नशे में हूँ।
मैं – मस्त तो आप हैं जीजू।
जीजू – नहीं मस्त तो तू है। एक बार ज़रा खुद को देख तो सही।
मैं – क्या देखूँ? मुझे तो तुम ही दिखाई दे रहे हो।
अब जीजू मस्ती में आ गया था। उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। मैं जानकर उसकी गोद में गिर गई और उसने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया।
मैं – जीजू, ये नीचे क्या लग रहा है?
फिर मैं थोड़ी कसमसाई पर उनका लंड और अंदर घुसता जा रहा था। मैं थोड़ी उठ गई। मैंने जानकर ऐसे उठी कि उनके सामने मेरे दोनों चूतड़ एकदम आगे आ जाएँ। जीजू ने मेरे चूतड़ों को देखते ही दबा दिया।
मैं – हाय रे जीजू मर गई। ये आप क्या कर रहे हो?
जीजू – श्लोका मज़ा आया ना? अब बिस्तर पर लेट जाओ।
मैं – नहीं नहीं तुम कुछ गड़बड़ करोगे।
जीजू – ज़्यादा भी बस थोड़ी-सी।
मैं – अच्छा ठीक है।
मैं मन ही मन बहुत ज़्यादा ख़ुश थी। मैं धीरे से जाकर बिस्तर पर लेट गई।
जीजू – अब आँखें बंद कर लो।
मैं – जीजू हटो मुझे छेड़ना मत।
मैंने अब आँखें बंद करीं। फिर जीजू बेड पर मेरे पास बैठ गए। उनका हाथ धीरे-धीरे मेरे जिस्म को गुदगुदाने लग गया था। वह मेरी दोनों टाँगों के बीच धीरे-धीरे उसे सहलाने लग गए। और ऊपर की तरफ़ आने लग गए। उनका हाथ मेरे बूब्स पर घूमने लग गया था।
इससे मुझे सनसनी-सी होने लग गई। वह जान-बूझकर बार-बार अपना हाथ मेरी चूत पर लगा रहे थे। जिससे मुझे ज़ोर से करंट-सा लग रहा था। फिर धीरे-धीरे उसने मेरी चूत पर क़ब्ज़ा कर लिया। मैं अब सिसकियाँ भरने लग गई थी। अब उसका हाथ मेरे बूब्स को सहला रहा था। उनका एक हाथ मेरे बूब्स पर था और दूसरा हाथ मेरी चूत पर था और वह बोले – श्लोका कैसा लग रहा है?
मैं – जीजू आपके हाथ में तो जादू है। प्लीज़ कुछ करो ना।
जीजू मेरे बूब्स को मसलने लग गए और उनका दूसरा हाथ मेरी चूत की गहराई को नाप रहा था।
मैं – जीजू बस अब नहीं प्लीज़ दूर हटो।
मैं बिस्तर से नीचे उतर गई और जीजू भी मेरे पीछे आ गया था। उसने मुझे पीछे से पकड़कर मेरे बूब्स को पकड़ लिया।
जीजू – श्लोका प्लीज़ करने दो। तुम्हें देखकर मेरा मन सब से कर रहा था। बस एक बार तुम्हें दबा दूँ। तुम्हारे ये बूब्स देखकर मुझसे रहा नहीं जाता है अब।
जीजू का लंड अब मेरे चूतड़ों में घुसा जा रहा था। मुझे उसके लंड का साइज़ तक चूतड़ों पर महसूस हो रहा था।
मैं मुस्कुराते हुए जीजू की तरफ़ देखकर बोली – पहले ये अपना मुझे मेरे हाथ में दे दो।
जीजू – क्या हाथ में दूँ?
मैं – वो अपना मोटा-सा लंड।
लंड का नाम सुनते ही जीजू तो जैसे पागल ही हो उठे और वह बोले – ले लो पकड़ो मेरा लंड। ये मेरा लंड तुम्हारा ही है।
मेरी तमन्ना पूरी होने लगी थी। मेरा मन ख़ुशी से भर उठा था। मुझे लगा कि अब चुदाई में ज़्यादा देर नहीं है। तो मैं नशे में होने का नाटक करते हुए बोली।
मैं – हाय रे जीजू, मत करो मुझे गुदगुदी हो रही है। देखो ना तुम्हारा नीचे का डंडा मेरी गाँड़ में लग रहा है।
उनका लंड अब मेरी गाँड़ में घुसने के लिए पूरा ज़ोर मार रहा था। उसे मैं अच्छे से महसूस कर पा रही थी। मैंने अपने आपको उनके हवाले करते हुए कहा – दूर हट ना जीजू। आपका लंड मेरी गाँड़ में घुसा जा रहा है।
लंड और गाँड़ का नाम सुनते ही जीजू बोले – श्लोका तुम्हारी गाँड़ है ही इतनी प्यारी। उसे देखते ही लंड का मन अंदर घुसने का होता है।
जीजू के मुँह से ये वर्ड्स सुनकर मैं एकदम पागल हो गई और अब उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया। वह मेरे बूब्स को अच्छे से मसल रहे थे। मैं अपनी कमर हिला-हिलाकर उनके लंड को गाँड़ की दरार में डाल रही थी। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं – जीजू बस भी करो। कोई आ जाएगा।
जीजू – कोई नहीं आएगा।
यह कहकर उन्होंने अपना पजामा उतार दिया और वह बोले – देख ये कितना खड़ा हुआ है।
उसने अपना कुर्ता उतार दिया और वह पूरा नंगा हो गया।
मैं बोली – जीजू आप ये क्या कर रहे हो? मुझे शर्म आ रही है।
उन्होंने मेरी एक न सुनी और मुझे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उनका लंड एकदम कड़क हो गया था और उन्होंने मेरा कुर्ता और पजामा खींचकर उतार दिया।
मैं – अरे ये क्या कर रहे हो जीजू? मैं तो नंगी हो जाऊँगी ना।
जीजू – दो नंगे जिस्म आपस में रगड़ खाएँगे तभी तो असली मज़ा आएगा।
फिर उन्होंने मुझे पूरी नंगी कर दिया। मेरी चूत एकदम से गीली हो गई थी। मैं बहुत ख़ुश थी कि अब मैं चुद जाऊँगी। मैंने अपनी दोनों टाँगें फैला लीं और मैंने जीजू को अपने ऊपर आने को इनवाइट किया। वह मुस्कुरा कर पास आये और मेरी दोनों टाँगों के बीच में आकर बैठ गये।
उन्होंने मेरी चूत को सहलाया और अपना चेहरा चूत के पास लाकर मेरी चूत को प्यार किया। मेरी चूत के दाने को जीभ से घुमा-घुमाकर चाटना शुरू कर दिया। मैं इससे झटपटा उठी और मैं बोली – आह आँह बहुत मज़ा आ रहा है जीजू। आह आँह मेरा पानी निकाल दो आह्ह।
फिर जीजू ने मेरी दोनों टाँगें ऊपर उठा दीं। इससे अब मेरी गाँड़ उनके सामने आ गई थी। फिर उसने अपना मुँह मेरी गाँड़ के छेद पर लगा दिया और जीभ निकालकर मेरे वो छेद को चाटने लग गये। मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी। उसने अपनी जीभ मेरी गाँड़ के छेद में घुसा दी। मैंने मज़े से अपनी आँखें बंद कर दीं। मैं समझ गई कि अब जीजू मेरी गाँड़ मारने की तैयारी कर रहे हैं।
जीजू – तुमने तो पहले से ही अपनी गाँड़ को चिकना बनाया हुआ है।
मैं – हाँ जीजू। मुझे आज लग रहा था कि आज ज़रूर आप ऐसा कुछ करने वाले हो। इसलिए मैं पहले से ही तैयारी करके बैठी थी। आह आँह मज़ा आ रहा है। मैंने अपनी गाँड़ पर ख़ुशबू वाली क्रीम लगा रखी है। आह आँह अब अपनी पूरी जीभ मेरी गाँड़ में डाल दो।
जीजू उठे और उन्होंने मेरी गाँड़ के नीचे एक पिलो रख दिया। मेरी गाँड़ अब थोड़ी ऊपर हो गई थी। फिर जीजू ने अपना लंड मेरी गाँड़ के छेद पर रख दिया।
जीजू – मेरी प्यारी श्लोका अब अपनी गाँड़ मरवाने के लिए तैयार हो जा।
मैं – हाँ मेरा राजा घुसा दो अंदर। मार लो मेरी गाँड़ को और मेरी जान ले लो।
फिर उनका लंड मेरी गाँड़ में घुस गया और अब मेरी गाँड़ की चुदाई शुरू हो गई। मैं मन ही मन झूम उठी और मैं बोली – आह आँह घुस गया रे आह्ह। और ज़ोर लगाओ जीजू।
जीजू – हाँ आह्ह ये ले मेरी साली।
जैसे-जैसे जीजू का लंड अंदर जा रहा था, वैसे-वैसे वह मुझे महसूस हो रहा था। फिर जब जीजू ने पूरा लंड बाहर निकालकर पूरा लंड वापस से अंदर डाला तो मैं बोली।
मैं – हाय जीजू, मज़ा आ गया। और धक्के मारो आह्ह और थोड़ी ज़ोर से मारो ना।
जीजू – हाँ मेरी जान तुम्हारी गाँड़ तो एकदम मक्खन मलाई जैसी है। इतनी चिकनी है कि मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। देखो मेरा लंड कैसे फटाफट चल रहा है।
गाँड़ पर लगी क्रीम से मुझे ज़रा-सा भी दर्द नहीं हो रहा था। मुझे अब मीठा-मीठा दर्द हो रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था मानो जीजू लंबी रेस का घोड़ा है जो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने में लगा हुआ था। पिलो के कारण उनका लंड पूरा का पूरा सीधा मेरी गाँड़ के अंदर जा रहा था, जिसे मैं एक-एक धक्के का पूरा मज़ा ले रही थी। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अचानक ही वह रुक गए और धीरे से अपना पूरा लंड मेरी गाँड़ से बाहर निकाल लिया। मुझे अपनी गाँड़ के छेद में अब ठंडी हवा लगी जैसे कुछ ख़ाली-ख़ाली हो गया हो। उसने नीचे से पिलो हटा दिया। अब वह मेरे ऊपर आकर सीधा लेट गया। उन्होंने अपना पूरा जिस्म मेरे ऊपर डाल दिया।
अब वह मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा रहे थे और मेरे होंठों को चूस रहे थे। उधर नीचे भी लंड अपना रास्ता खुद बना रहा था। मैं भी कसमसा कर लंड को निशाने पर लेने की कोशिश कर रही थी। मेरी चूत पानी से चिकनी हो गई थी। आख़िर लंड ने अपना रास्ता ढूँढ़ लिया।
अब उनका लंड मेरी चूत में घुस गया और मेरे मुँह से आह आँह की मस्त आवाज़ें निकलने लग गईं। मैंने नीचे से ज़ोर से लगाया तो लंड और अंदर चला गया। इससे मैं तड़पकर बोली – आह आहा जीजू धक्के मारो ना। ये क्या कर रहे हो मुझे चोदो।
फिर जीजू ने अपनी बॉडी को अपनी दोनों कोहनियों पर उठा लिया। अब मेरा जिस्म उनके वेट से फ़्री हो गया। जीजू ने लंड को बाहर निकाला और ज़ोर से अंदर धक्का मारा। जीजू का पूरा लंड अंदर तक चला गया और मेरे मुँह से चीख निकल गई और मेरी चूत गीली होने की वजह से उसमें से फच-फच की आवाज़ आ रही थी।
मैं – आह राजा और ज़ोर से मेरी चूत को फाड़ दो। तुम्हारा लंड मेरी चूत में जड़ तक जा रहा है।
जीजू – हाँ मेरी रानी, तुम्हें देखकर ये लंड कब से तड़प रहा है। अब मैं तुझे और कसकर चोदूँगा आह आँह।
मैं – आह मेरे जीजू सच में मेरी चूत फाड़ दी है तुमने। आह आँह माँ मैं मर गई।
जीजू – हाँ हाँ मेरी जान आज तो फाड़ ही दूँगा मैं तेरी चूत को। ये साली मेरी जान तू क्या मस्त चीज़ है।
अब जीजू के धक्के और तेज़ होने लग गए थे और रूम में फच-फच की आवाज़ें और तेज़ हो गई थीं। जीजू अपनी फ़ुल स्पीड से मुझे चोद रहे थे और मैं भी नीचे से अपनी गाँड़ उछाल-उछालकर उनका साथ दे रही थी। मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा था। मेरी सिसकियाँ बढ़ रही थीं। और मैं गरमी में बोली – आह आँह जीजू मेरे बूब्स को मसल डालो जीजू। आह्ह और ज़ोर से मसलो।
मेरी सिसकियाँ अब बढ़ती ही जा रही थीं और मेरे चूतड़ अपने आप ऊपर-नीचे हो रहे थे। जिससे लंड अपने आप अंदर-बाहर हो रहा था। जीजू भी अपनी पूरी ताक़त से धक्के मार रहे थे। मेरे मुँह से मेरी सिसकियाँ तेज़ होने लग गईं।
अचानक ही जीजू बोले – आह आहा श्लोका मैं तो गया। मुझे कसकर पकड़ लेना आह आँह।
मैं जीजू से ज़ोर से चिपक गई। अब मेरा निकलने वाला था। अब उनका लंड मेरी चूत के एंड तक गया हुआ था। और जीजू का दबाव पूरा उस पर था इसलिए मैंने अपनी दोनों टाँगें खोलीं और लंड और अंदर चला गया। जीजू ने फिर से धक्के मारने शुरू कर दिए और मैं बोली – उई माँ मार गई मेरा पानी निकल गया आह आँह। जीजू मुझे चोदो आह आँह मैं मर गई।
फिर ऐसे ही मैंने अपना सारा पानी निकाल दिया। उधर जीजू ने अपना लंड का सारा पानी मेरे बूब्स पर निकाल दिया। उनका लंड रुक-रुककर पानी छोड़ रहा था। मैंने झट से लंड को अपने मुँह में भर लिया। अब मैं उनका चिकना रस चाट रही थी।
मैंने लंड चाट-चाटकर पूरा साफ़ कर दिया। फिर मैं आराम से लेट गई। जीजू भी मेरी बग़ल में लेट गए थे। वह ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रहे थे और मैंने भी उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया। हम वैसे ही नंगे पड़े रहे और फिर हम दोनों कब सो गए, मुझे पता ही नहीं चला।
फिर जीजू और मेरी चुदाई काफ़ी दिनों तक चली और आप लोगों को पता ही है ऐसी बातें ज़्यादा दिन छुपती नहीं हैं। फिर दीदी को शक हो गया और दीदी ने शांति और समझदारी से काम लिया। दीदी ने मेरे कॉलेज के हॉस्टल में ही मुझे रूम दिला दिया। अब मैं दीदी और जीजू से बहुत दूर होकर स्टडी कर रही हूँ।
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ये Jawan Sali Garam XXX Story आपको कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताये….
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