Sexy Bhabhi Jordar Chudai
मेरा नाम बब्बन है और मैं भोपाल में रहता हूँ। यह कहानी मेरे और मेरे घर के पड़ोस में रहने वाली भाभी की है। चलो, आपका ज़्यादा समय खराब न करते हुए मैं सीधे ही अपनी स्टोरी पर आता हूँ। यह कहानी अभी एक महीने पहले की है।
सॉरी, मैं आपको इस कहानी की सेक्स गॉडेस से इंट्रो करवाना तो भूल ही गया। मेरी भाभी का नाम हेतल है और उनकी उम्र तीस साल है। उनका जिस्म एकदम गठीला है, और उनका सेक्सी फिगर साइज़ बत्तीस-चौंतीस-बत्तीस है। जो कि मुझे बहुत ही अच्छा लगता है।
यह सफ़र शुरू ऐसे हुआ कि मैं मेरी गली का सबसे शांत और सबसे मिलने-जुलने वाला लड़का हूँ। और मेरा भाभियों की तरफ़ शुरू से ही अट्रैक्शन रहा है। अभी कुछ दो साल पहले हमारे वहाँ एक कपल शिफ्ट हुआ था। उनकी एक बेटी भी थी। मैं ऑफिस से आया तो मैंने देखा कि सामान रखा हुआ था।
जब मैंने जाकर देखा तो वहाँ पर एक ढीला-सा एक आदमी और एक बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी औरत के साथ वो झाड़ रहा था। उनकी एक छोटी-सी बेटी भी उनके साथ थी। उस पल देखकर तो लगा कि उस औरत को वहीं पर लिटाकर मैं चोद दूँ।
पर क्या करूँ, ऐसा हो नहीं सकता था। और ऐसे ही कुछ दिन निकल गए तो वो भाभी शाम के टाइम खाना खाकर बाहर टहला करती थीं। अब उनको देखकर मैं भी टहलने लग गया। तब हमारी नॉर्मल ही हेलो होने लगी। फिर धीरे-धीरे हमारी नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं।
ऐसे ही बात करते हुए मुझे पता चला कि वो यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। और उनके पति भोपाल के बाहर जॉब करते हैं, और वो सिर्फ़ वीकेंड्स पर ही घर आते हैं। मैं समझ गया कि ये लंड की भूखी है। इसका ढीला पति इसकी चुदाई नहीं कर पाता है। मैंने एक जुगाड़ किया और मैं उनके साथ जुगाड़ करके स्टडी करने लग गया।
आस-पड़ोस के सभी लोग जानते थे कि मैं बहुत ही शरीफ़ लड़का हूँ, तो मेरे उसके घर आने-जाने में किसी को कोई दिक्कत नहीं थी। अब मैं रोज़ भाभी को देखकर उनके नाम की मुठ मारता था। मैं बस उनको चोदने के बारे में सोचता रहता था। और आख़िरकार वो दिन आ ही गया, जब मैंने डेयरिंग करके आगे बढ़ने की सोची। वो दिन ये था कि हम पढ़ रहे थे।
होली में भाभी चुदाई कहानी
और अगले दिन होली थी, तो मैं बोला – भाभी अब ये छोड़ो, कल होली खेलते हैं और परसों फिर से स्टडी करेंगे।
भाभी – मैं थोड़ी खेलती हूँ, और मेरे वो भी नहीं हैं। कोरोना का चक्कर चल रहा है, आप भी मस्त खेलना कल।
मैं – ठीक है।
फिर मैं घर आ गया, और अगले दिन सुबह-सुबह सब होली खेल रहे थे। मैं सीधे उनके घर आ गया। मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने मस्त एक डीप नेक वाला सूट पहना हुआ था। उनका पति बाहर होली खेल रहा था, और मुझे जैसे ही मौक़ा मिला तो मैंने काफ़ी सारा गुलाल उठाया और उनको मैं लगाने लग गया।
इस बहाने मैंने पूरे शरीर पर रंग लगा दिया। उसी टाइम मैंने उनके बूब्स और कमर पर भी अच्छे से रंग लगा दिया। इसी बीच मेरा छह इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड उनको अब टच कर रहा था। भाभी मेरा इंटेंशन समझ चुकी थीं।
भाभी – बब्बन अब मेरी बारी है, अब तू ठीक से खड़ा हो जा।
जैसे ही मैं कुछ समझ पाता, भाभी ने मेरे गाल पर रंग लगाते हुए सीधा अपना हाथ मेरी लोअर में डाल लिया। अब वो मेरे लंड को हिलाते हुए बोलीं – यही चाहता है ना तू? मैं काफ़ी दिनों से तुझे देख रही हूँ, ये मुझे कुछ ज़्यादा सलामी दे रहा है। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनकी इस हरकत के बाद मेरे तो होश ही उड़ गए थे। मैंने उनको वहीं पर खड़े-खड़े किस किया और उनके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। क़रीब दस मिनट की स्मूच के बाद हम दोनों अलग हुए और भाभी बोलीं।
भाभी – तुम अभी जाओ, लोगों का आना-जाना लगा रहता है।
मैं – भाभी अब आपने सलामी ली है तो इसे अब आप शांत भी कर दो ना।
तो मेरे बहुत मनाने पर वो अपने रूम के डोर के पीछे मुझे ले गईं। वहाँ भाभी मुझे ब्लोज़ॉब देने लग गईं। क़रीब आठ-दस मिनट के बाद मैंने उनके मुँह में ही अपना सारा पानी निकाल दिया।
भाभी मेरा सारा पानी पी गईं, और मैं बोला – अब ट्रेलर तो दे दिया, अब पूरा कोर्स कब करना है?
भाभी – मैं तुम्हें फ़ोन करूँगी। तुम्हारा इतना बड़ा लंड देखकर मैं भी पाल हो रही हूँ। इनका तो लंड भी छोटा-सा है और न ही ये ठीक से सेक्स करते हैं।
फिर उन्होंने मुझे एक किस किया और मैं बाहर आ गया। अब मेरे पास दो दिन थे। तो मैं भाभी के ओरल सेक्स को याद करके मुठ मार रहा था। आख़िर वो दिन आ ही गया जब मैंने भाभी को चोदना था।
मुझे भाभी का कॉल आया और वो बोलीं – शाम को मेरे पति जा रहे हैं, तुम कल सुबह नौ बजे आ जाना। फिर हम दोनों दिन भर साथ रहेंगे।
मैं – ठीक है।
फिर फ़ोन कट हो गया और रात को सोते टाइम मैंने उनको याद करके मुठ मारी, फिर मैं आराम से सो गया। सुबह मैं सात बजे नॉर्मली उठा और नहा-धोकर मैं अपनी बुक्स ली और मैं मम्मी से बोला।
मैं – मम्मी आज अपने दोस्त के घर स्टडी करने जा रहा हूँ, मैं आज रात तक ही वापस आऊँगा। हो सकता है कि मैं रात को वहीं पर सो जाऊँ, तो मैं कल सुबह भी आ सकता हूँ।
फिर मैं घर से निकल सीधा मेडिकल स्टोर से एक कंडोम लेकर सीधा मैं भाभी के घर में चला गया। मैंने देखा कि भाभी ने आज रेड कलर की साड़ी पहनी हुई थी। वो भी विदाउट स्लीव्स वाला ब्लाउज़ और उन्होंने साड़ी को कमर के नीचे बाँधा हुआ था।
मैं तो उनको देखता ही रह गया। मैंने गेट को लॉक किया और उनको उठाकर मैं सीधे बेडरूम में ले गया। वहाँ जाते ही मैं उन्हें लिप्स किस करने लग गया, और मैं उनके बूब्स के साथ खेलने लग गया। भाभी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और वो उसको मसलने लग गईं।
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हम दोनों ने कब एक-दूसरे के कपड़े उतारे, ये हमें पता तक नहीं चला। जैसे ही भाभी के मैंने कपड़े उतारे और मैंने भाभी की चूत पर हाथ लगाया। तो मैंने देखा कि भाभी की चूत पर एक भी बाल नहीं है। मानो उनकी चूत मेरा ही वेट कर रही थी। मैंने उनकी चूत को सहलाना शुरू किया तो भाभी ज़ोर-ज़ोर से आह-आह कर रही थीं।
भाभी – बब्बन प्लीज़ मेरी चूत में अपना लंड घुसा दो।
भाभी के मुँह से ये सब सुनकर मैं जोश में आ गया।
और मैं बोला – रुक साली रंडी, मैं भी तो दो दिन से तड़प रहा हूँ, अब तू भी थोड़ी तड़प ना।
फिर मैंने भाभी की चूत पर अपना मुँह रखा और मैं उनकी चूत को चाटने लग गया। भाभी और मैं उनहत्तर की पोज़िशन में आ गए थे। अब भाभी मेरा लंड चूस रही थीं और मैं उनकी चूत को चाट रहा था। क़रीब पाँच मिनट में भाभी की चूत ने पानी छोड़ दिया। और मैं उसकी चूत का पानी मैं पूरी तरह से चाट गया। अब बारी मेरी थी तो मैं सीधा हुआ और मैंने कंडोम लगाने के लिए भाभी को दिया।
भाभी – मैं आज छह महीने बाद चुद रही हूँ, प्लीज़ बिना कंडोम के करो, मैं बाद में गोली खा लूँगी।
मैंने जैसे ही एक धक्का मारा वैसे ही भाभी की आँखों में मुझे दर्द दिखा। मैं समझ गया कि जिसकी एक बेटी है और फिर भी उसे दर्द हो रहा है, तो मतलब कि उसकी चुदाई ठीक से नहीं हुई है। मैं थोड़ी देर रुका और फिर मैंने धीरे-धीरे दूसरे शॉट मारे और पूरा लंड मैंने अंदर उतार दिया। जैसे ही मैंने पूरा लंड अंदर डाला तो भाभी चिल्लाते हुए बोलीं – आहाह आहाह इसे बाहर निकालो।
पर मैं वैसे ही रुका रखा, और थोड़ी देर बाद जब उनको आराम हुआ तो मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। जैसे-जैसे धक्कों की स्पीड तेज़ हो रही थी, वैसे-वैसे भाभी मुझे गालियाँ दे रही थीं। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
भाभी – साले बहनचोद आराम से चोद, मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ।
पंद्रह मिनट चोदने के बाद मैंने देखा कि भाभी दो बार झड़ चुकी हैं, और मैं भी पीक टाइम पर ही था।
मैं – भाभी कहाँ निकालूँ?
भाभी – मेरे मुँह में डाल अपना गरम-गरम पानी, मैं इसे पीना चाहती हूँ।
फिर मैंने पाँच-सात धक्कों के बाद अपना लंड चूत से निकालकर उनके मुँह में दे दिया। अब मैंने सारा पानी उनके मुँह में भर दिया, और वो उसे पी गईं। मैंने पहली बार भाभी का ऐसा रूप देखा था। भाभी और मैं लेटे रहे।
भाभी की आँखों में आँसू थे क्योंकि उन्हें आज पहली बार संतुष्टि मिली थी। फिर थोड़ी देर बाद हमने खाना खाया और फिर उसके बाद दिन भर में हमने सात बार चुदाई की। फिर मैंने भाभी की मस्त गाँड़ भी मारी, पर मैं ये आपको इस कहानी के नेक्स्ट पार्ट में बताऊँगा।
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ये Sexy Bhabhi Jordar Chudai की कहानी आपको कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताये…
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