Cute Sexy Sali XXX
हाय दोस्तों, मेरा नाम विपिन है। मैं रायपुर से हूँ। मेरी उम्र 28 साल है और मैं शादीशुदा हूँ। मुझे देसी सेक्स कहानी पढ़ने में बहुत ही मज़ा आता है। अक्सर सुबह की चाय के बाद मैं इंटरनेट पर देसी सेक्स कहानी पढ़ता हूँ। इतनी सारी स्टोरी पढ़ने के बाद मैंने सोचा, क्यों न मैं भी आपके लिए अपनी एक सच्ची कहानी लिखूँ। तो आज मैं आप सबके लिए एक अपनी सच्ची कहानी लिख रहा हूँ।
जैसे कि मैंने लिखा कि मैं शादीशुदा हूँ और मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं। मेरी एक साली है, वह 19 साल की है। अभी एक साल पहले तक तो मैंने उससे इस तरह की नज़र से नहीं देखा था। पर उसकी तरफ़ से मुझे ग्रीन सिग्नल मिलने पर मैं उत्तेजित होने लग गया।
पर अब प्रॉब्लम थी कि यह पहल कौन करेगा। मैं रायपुर में था और वह रायपुर से दूर क़रीब 100 किमी दूर एक छोटे से क़स्बे में थी। उससे मेरी बात फ़ोन पर आती थी। वैसे तो मैं फ़ोन पर ही सब कुछ करने के लिए मना लिया था। पर मुझे शक था कि लड़कियों की आदत होती है, वह पहले ना करती हैं पर अंदर से उनकी हाँ होती है।
इसलिए एक-दो बार जब उसकी खुली हँसी मज़ाक से आगे बढ़कर, उसे मैं एडल्ट जोक आदि सुनाने लग गया। अब यह तय हो गया था कि अब पक्का यह चुद सकती है। पर वह बात करते-करते मुझे मना करते हुए बोली – नहीं जीजा जी, अगर किसी को पता चल गया तो।
मैं – किसी को पता नहीं चलेगा। मैं मौक़ा देखकर ही काम करूँगा।
वह मुझ पर भरोसा करती थी और मुझे पसंद भी करती थी। उसे मेरी नज़रों में पसंद का सब कुछ पता था और वह उसका ख़्याल रखती थी। इससे ही बात होती रही और हम दोनों बातों में अब खुल गए थे। फिर उससे मिलने की चाहत मुझे ज़्यादा हो गई, इसलिए मैं एक दिन अपने ससुराल आ गया।
मेरी ससुराल में मेरे सास-ससुर, दो साले और दो सालियाँ और साले की वाइफ़ हैं। मेरे पास उस टाइम स्विफ्ट कार थी। मैं उसी में अपने ससुराल गया था। जब मैं ससुराल जाता हूँ तो दो-तीन दिन वहीं पर रुकता हूँ। इस दौरान सब लोग मेरी कार में ही बाहर घूमने जाते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ।
वह मेरे बग़ल की सीट पर आगे बैठ गई थी। पीछे दोनों मेरी सहेलियाँ बैठी थीं। वहाँ पर वह मौक़ा लगते ही मेरे क़रीब आ जाती है और उससे सेक्सी बातें करने लग गया। सच बताऊँ तो मैंने अभी तक उसे टच तक नहीं किया था।
मैंने उसे बोला – जब तक तुम खुद नहीं चाहोगी, तब तक मैं उसे टच नहीं करूँगा।
इसलिए मैं उससे सिर्फ़ बात ही करता था। मैंने उसे पर कोई ज़ोर नहीं दिया ताकि वह जल्दी से जल्दी मान जाए। पर वह चाहती थी और खुद सही मौक़े का वेट कर रही थी। और इस बार मैं ख़ाली हाथ वापस नहीं जाने वाला था। मैं अपनी साली को अपने लंड के नीचे लाना चाहता था।
इस तरह मैंने दो-तीन बार ससुराल के चक्कर लगाए, पर वह मुझसे चुद न सकी। आख़िरी बार अभी तीन महीने पहले जब मैं अपने ससुराल गया, तब तक मैंने उसे टच नहीं किया था और न ही कर सका था। पर मैं उससे सेक्सी बातें करके उसे गरम ज़रूर कर रहा था। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
इस बार मैं अपने ससुराल गया तो हम लोग वहाँ से एक धार्मिक जगह पर घूमने गए। वहाँ से वह 1.5 घंटे की दूरी पर था। अब आपको पता ही है कि स्विफ्ट कार में कितनी जगह होती है। फिर भी आगे तीन और पीछे 4 लोग बैठे थे। मेरे ससुर और बड़े साले सलहज को छोड़कर बाक़ी सब गए थे।
वह हमेशा ही तरह मेरे बाजू में आगे बैठी थी। मतलब मैं आगे ड्राइवर सीट पर मेरे साथ मेरी साली बैठी थी और उसके साथ मेरा छोटा साला बैठा था। यानी बीच में वह थी। बीच में होने की वजह से जहाँ पर कार के गियर होते हैं, वहाँ वह दोनों तरफ़ टाँगें खोलकर बैठी हुई थी।
उसकी एक टाँग मेरी टाँग से सटी हुई थी और उसकी दूसरी टाँग मेरे साले की टाँग के साथ लगी हुई थी। उसकी दोनों टाँगों के बीच कार का गियर था। मैं पहले से ही काफ़ी गरम था। उधर से वह भी मुझे बड़ी ही नशीली आँखों से देख रही थी। मैं कार ड्राइव कर रहा था।
तो जब मैं गियर लगा रहा था तो मैं उसकी जाँघ को टच कर रहा था। इससे मैंने पहले-पहले कर रहा था। वह सलवार सूट में थी। लड़कियों का पजामा ढीला ही होता है। उसमें से ही मैं उसकी जाँघ को रगड़कर टच कर रहा था। फिर अपना हाथ गियर पर रखते ही मैं मौक़ा देखकर अपना अँगूठा उसकी चूत के पास रखकर रगड़ देता था।
जिस टाइम हम जा रहे थे तो उस टाइम दिन था। सो मैंने ज़्यादा रिस्क लेना ठीक नहीं समझा। इसलिए मैं उसको सिर्फ़ टच ही कर रहा था। जब भी मैं गियर लगाता था तो मैं उसकी चूत को सहला देता था। इससे वह कसमसा जाती थी और वह मेरी तरफ़ झुकी नज़र से देख रही थी।
गियर डालते हुए भी मैं अपनी कोहनी से उसके बूब्स पर सहला रहा था। यह सब पूरे रास्ते चल रहा था। फिर हम वहाँ पर पहुँच गए। वह मुझसे वहाँ पर नज़र मिलाती और मुस्कुरा देती थी। मैं भी उसे नॉटी स्माइल दे रहा था। हम दोनों किसी को कुछ नहीं कह रहे थे।
अब वापस आते टाइम शाम हो चुकी थी और अँधेरा हो चुका था। उस अँधेरे में मैं अपने आप उसकी चूत को गियर लगाते हुए रगड़ने लग गया। उसने खुद अपनी टाँगें खोली हुई थीं। अब मैं अपना पूरा हाथ उसकी चूत पर ले जाने लग गया। तो वह कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित हो रही थी।
मेरी कोहनी उसके बूब्स को रगड़ रही थी। इससे मेरा लंड भी अब कड़क हो रहा था। फिर मैं थोड़ी देर बाद उसकी चूत को सलवार के ऊपर से ही अपनी उँगली को रगड़ने लग गया। मैं अपनी उँगली अंदर धक्का देने लग गया। कुछ देर बाद मैंने उस अँधेरे में महसूस किया कि उसकी चूत गीली हो चुकी है।
अब वह और भी मस्त लग रही थी। मैं उससे कुछ बोल नहीं रहा था। और न ही वह मुझे कुछ बोल रही थी। बाक़ी सब कार में आपस में बातें कर रहे थे। किसी को भी हमारी इस रस लीला का कुछ पता नहीं था, क्योंकि वे लोग सब मुझे शरीफ़ मानते हैं।
जब हम सब घर पहुँचे तो वह मुझसे कुछ नहीं बोल रही थी। तो मैंने उससे मुस्कुराते हुए आँखों से इशारा किया। फिर वह मुस्कुरा कर बाथरूम में चली गई। फिर मैं अपने रूम में चला गया और वह भी वहाँ आ गई। यह कोई पहली बार नहीं था। वह पहले भी मेरे पास बैठी थी जब मैं अपने रूम में सोता था।
फिर वह मुझसे बातें करने लग गई, इसलिए उस दिन भी वह मेरे पास आ गई। मैं बेड पर लेटा हुआ था। उससे मैं कोई बात नहीं कर रहा था। पर मैं उसकी बेचैनी को समझ सकता था। उसने आँखों ही आँखों में मुझसे बहुत कुछ बोल दिया था। मैंने मौक़ा देखकर उसका हाथ पकड़ लिया और मैं उसे दबाने लग गया।
वह कुछ भी नहीं बोली, तो मैंने उसका हाथ सहलाना शुरू कर दिया। अब मैं अपना हाथ उसके कंधों पर ले गया और उसे सहलाने लग गया। उसने अपना सिर झुका दिया, तो मैंने थोड़ा और आगे बढ़ते हुए मैंने उसके बूब्स को दबाया और सहलाना शुरू कर दिया। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वह – जीजू कोई देख लेगा।
मैं – सब सो गए हैं, कोई नहीं देखेगा।
वह नहीं मानी, तो मैं बोला – मैं ऊपर छत वाले बाथरूम में जा रहा हूँ, तुम भी वहीं पर आ जाना।
उन दिनों गर्मियों के दिन थे और मैं ऊपर चला गया। कुछ देर बाद वह भी आ गई। मैंने उसे वहाँ पर पकड़ लिया और मैं उसे किसिंग और उसे सहलाने लग गया। वह नाइटी में थी और उसने अंदर ब्रा भी नहीं डाली हुई थी। मुझे तो जैसे ही जन्नत ही मिल गई थी, पर मैं उसे वहाँ पर कैसे चोदूँ मुझे यह समझ नहीं आ रहा था।
क्योंकि वहाँ कोई भी आ गया तो मेरी वाट लग जाती थी। तो वह डरी हुई थी, पर मैं यह मौक़ा अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। मैंने अपना हाथ उसकी नाइटी में डालकर उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी नाइटी ऊपर करके उसके बूब्स को चूसने लग गया। इसके साथ-साथ मैं अपना हाथ उसकी पैंटी में डालकर उसकी चूत को रगड़ रहा था। उसकी चूत पहले से ही गीली थी और वह बहुत ही मस्त हो गई थी।
वह – जीजू अब और नहीं रहा जाता।
मैंने फ़र्श पर बैठकर उसे अपनी गोद में उसकी दोनों टाँगें दोनों तरफ़ रखकर बिठा लिया। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी चूत पर लगा दिया। और मैं धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डालने लग गया। पर मेरा 8 इंच का लंड उसकी चूत में घुस नहीं रहा था। उसे दर्द भी हो रहा था।
इसलिए उस रात चुदाई नहीं हो सकी, पर उस रात वह दोनों तक मुझसे मज़ा लेती रही और मैं उसके साथ मज़ा करता रहा। उस रात हम दोनों पूरा मज़ा नहीं ले पाए थे, इसलिए मेरी बेक़रारी और भी ज़्यादा बढ़ गई थी। दूसरे दिन हम दोनों ने फिर कभी मिलने का वादा किया और फिर वह मुझे बाय कहकर वहाँ से चली गई। अब मैं भी वहाँ से जल्दी निकलने की तैयारी करने लग गया। अब आगे की कहानी फिर कभी मैं आपको बताऊँगा।
ये Cute Sexy Sali XXX की कहानी आपको कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताये…
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