Desi Doctor Porn
मैं निलेश देहरादून से हूँ। मेरी उम्र 25 साल है और मेरी अभी शादी नहीं हुई है। मैं पेशे से एक डॉक्टर हूँ, पर मैं बहुत कम प्रैक्टिस करता हूँ। पर अब तक जिसका भी मैंने इलाज किया है, भगवान की कृपा से वह आज भी पूरा हेल्दी है। मैं अपने मरीज़ों को अपनी पूरी लगन से इलाज करता हूँ।
मैं एक बहुत ही शरीफ़ लड़का हूँ। मैंने कभी किसी लड़की के साथ सेक्स नहीं किया था। मेरे पास एक लेडी मरीज़ भी आती है, पर मैंने आज तक उन्हें गलत नज़र से नहीं देखा। पर अभी कुछ समय पहले मेरे साथ एक ऐसी घटना हुई, जिसने मेरे पूरे बिहेवियर को बदलकर रख दिया।
यह बात पिछले साल दिसंबर 2025 की है। शहर के साथ एक गाँव में से एक लेडी अपनी बेटी, जिसका नाम अंजना था, उसको लेकर मेरे पास आई। उसके दिमाग में बुखार था। जिसकी वजह से वह लड़की पागलों की तरह बर्ताव कर रही थी। मैंने उसकी रिपोर्ट देखी और लड़की की माँ को देखा।
उसकी माँ की उम्र क़रीब 34 साल की होगी। वह दिखने में बहुत मस्त माल लग रही थी। उसके बूब्स एकदम तने हुए थे। उसकी माँ का क्लीवेज बहुत ही मस्त दिख रहा था और उसके लंबे बाल, उसके रसीले होंठ, पतली कमर थी। अभी वह बैठी हुई थी, इसलिए मैं उसके चूतड़ों का नाप नहीं ले सका।
पर मेरा अंदाज़ा था कि उसके चूतड़ भी बहुत मस्त तरीके से मटकते होंगे। कुल मिलाकर मैं उसकी बेटी का इलाज भूल गया था और मैं उसे अपनी आँखों से ही चोदने लग गया था। मेरी इस नज़र को वह भी भरपूर एंजॉय कर रही थी और बिना मुझे टोके वह मेरी तरफ़ अपने हुस्न का दीदार करा रही थी।
तभी मैं होश में आया और मैं बोला – देखिए, आपकी बेटी का इलाज लंबा चलेगा और इस बार इलाज में कोई ढील नहीं होनी चाहिए।
वह मेरी बात ध्यान नहीं दे रही थी और मुझे ही देखी जा रही थी। जब मैंने दोबारा बोला तो वह हँसकर बोली – जी जी हाँ डॉक्टर साहब, जो आप कहेंगे मैं वही करूँगी। उसकी इस बात पर मुझे ऐसा लगा कि वह मेरी तरफ़ आकर्षित हो रही है। फिर मैं भी अपने लंड पर हाथ फेरते हुए बोला – हाँ, आपको इतना ख़्याल तो रखना चाहिए। जो मैं कहूँ आप वही करें।
वह मेरे लंड को देख रही थी और मुस्कुरा रही थी। फिर उसने कुछ नीचे गिरा दिया और उठाने के बहाने करते हुए कुछ ज़्यादा ही नीचे झुक गई। मुझे अब उसके क़रीब आधे बूब्स दिख गए और मैं बोला – मुझे खुद भी ज़्यादा ध्यान रखना है, ताकि आपके इलाज में मुझे चैन मिल जाए।
मैंने उसके बूब्स पर अपनी वासना भरी नज़रें डाले रखीं और मैं बोला – मतलब आपको कैसे चैन? मैं कुछ समझा नहीं?
वह उसी तरह झुकी हुई बोली – अरे जब मेरी बेटी ठीक हो जाएगी, तब मुझे चैन मिलना तो तय है ना।
मैं उसकी मंशा भाँप ली और मैं बस मुस्कुरा दिया। मैंने पर्चे पर दवाई लिख दी और उसे मैंने दवा लेने का तरीक़ा समझा दिया। फिर वह अपनी गाँड़ मटकाते हुए चली गई। मुझे उसकी गाँड़ का मटकना एक अलग-सा इशारा दे रहा था। एक हफ़्ते बाद वह फिर से आई। इस बार वह बहुत ख़ुश थी। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी पर पढ़ रहे है.
उसने बताया कि उसकी बेटी अंजना को मेरी दवाई से आराम हो रहा है। यह सुनकर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई और फिर मैंने वही दवाई और एक हफ़्ते के लिए कंटिन्यू कर दी। आज उसने मेरे साथ खुलकर बात की और वह मुझे बार-बार थैंक यू कह रही थी। क्योंकि मेरी दवा से उसकी बेटी ठीक हो रही है, मुझे भी उसकी बातों से बहुत सुकून मिला।
जब वह जाने लगी तो उसने मुझे मुस्कुराकर देखा और उसने अपने घर का एड्रेस बताकर मुझे अपने घर पर वह इनवाइट करती है। मैं मान जाता हूँ, क्योंकि उसने मुझे सोमवार को आने को कहा था। इसलिए मैंने सोचा चलो देखते हैं। फिर मैं उसके घर चला जाता हूँ।
मुझे भी न जाने क्यों उसके घर जाने में ख़ुशी-सी मिली थी। मैं उसकी बताई गई जगह पर पहुँचा तो वह औरत गज़ब का मेकअप किए हुए थी। उसने सलवार सूट डाला हुआ था और वह मेरा वेट कर रही थी। मुझे देखकर उसने मुझे आवाज़ देकर बुला लिया। सच में वह क्या गज़ब की माल लग रही थी।
जैसे कोई नई-नवेली दुल्हन हो। आज उसको देखकर कोई भी नहीं कह सकता था कि वह एक 10 साल की बेटी की माँ है। मैं उसके घर जाकर उसकी बेटी का हाल-चाल पूछने लग गया। उसने बताया कि उसकी बेटी अब ठीक है और आज वह अपने पापा के साथ देहरादून गई हुई है और वह रात को ही वापस आएगी।
फिर वह मेरे लिए पानी और चाय लेकर आई और वह मुझसे बात करने लग गई। फिर वह मेरे लिए नाश्ते की ट्रे लेकर आई। वह मेरी बग़ल में बैठ गई। और फिर वह मुझे अपने हाथों से नाश्ता खिलाने लग गई। फिर चाय-नाश्ता करके मैं बोला – ठीक है, अब चलता हूँ।
अंजना की माँ, जिसका नाम मैंने अभी तक नहीं बताया, उसका नाम प्रतिमा था। उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे बैठाया और वह बोली – मेरा भी इलाज कर दो ना। मैंने उसको लालस भरी निगाहों से देखने लग गया और मैं अपने लंड पर हाथ फेरते हुए बोला – आपको क्या हुआ? आप तो अच्छी-भली लग रही हो?
वह अपने बूब्स को खुजाते हुए बोली – पहले आप कसम खाओ कि किसी को नहीं बताओगे।
मैंने अपना लंड मसलते हुए कहा – आप अपना मर्ज़ बताओ।
प्रतिमा ने झुककर अपने गोरे-गोरे बूब्स दिखाए और वह बोली – पहले आप कसम लो।
मैंने उसके बूब्स को आँखों से चोदते हुए कहा – चलो ली कसम, मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊँगा।
प्रतिमा शर्माते हुए बोली – मैंने जब से आपको देखा है, तब मुझे न जाने क्या हो रहा है। मेरा मन आपके आगोश में आने को कर रहा है।
मैं उसी दिन समझ गया था कि इस औरत को एक जवान लंड की ज़रूरत है।
मैं – प्रतिमा जी, आप क्लिनिक पर ही बता देतीं कि यह बात है। मैं भी काफ़ी दिनों से किसी को अपने आगोश में लेने को तड़प रहा हूँ।
प्रतिमा मेरे क़रीब आई और बोली – डॉक्टर साहब तो कर दो ना मेरा इलाज।
मैं – कल तुम मेरे क्लिनिक में आ जाना, मैं तुम्हारा इलाज कर दूँगा। कल तुम 2 बजे आ जाना।
प्रतिमा – ठीक है, मैं कल 2 बजे आ जाऊँगी।
मैं – ठीक है, अब मैं चलता हूँ।
प्रतिमा – एक बार मुझे अपनी बाँहों में तो ले लो।
मैंने अपनी बाँहें खोलीं और मैं बोला – ठीक है, आ जाओ।
मैं फिर उसे अपनी बाँहों में भर लिया। मुझे बहुत मज़ा आया। फिर मैंने इतना टाइट हग किया कि उसके बूब्स एकदम मेरे सीने पर मसल गए। इससे उसके मुँह से गरम आह निकल गई। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मैंने काफ़ी देर उसके होंठों को चूसा। वैसे मेरा मन तो अभी उसको चोदने का था, पर तभी मैंने रुकना ठीक समझा। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी पर पढ़ रहे है.
अगले दिन मैंने अपने ऑफिस से कहा – यार आज मैं सिर्फ़ 12 बजे तक ही मरीज़ों को देखूँगा।
12 बजे के बाद ऑफिस बॉय ने मरीज़ों को कह दिया कि आज डॉक्टर साहब बिज़ी हैं। अब वे कल मिलेंगे। वह मेरे पास आया तो मैं बोला।
मैं – अब तुम भी जाओ। आज तुम्हारी भी जल्दी छुट्टी है और केबिन लॉक करके चले जाओ।
फिर मेरा ऑफिस बॉय भी चला गया और मैं प्रतिमा के इंतज़ार में बैठकर सोचने लग गया कि कैसे कुछ किए बिना वह औरत मुझसे चुदने आ रही है। फिर ठीक 2 बजे 5 मिनट पर प्रतिमा मेरे क्लिनिक पर आ गई। मैंने गेट खोला तो देखा आज वह बहुत गज़ब की दिख रही थी। उसने शिफ़ॉन की साड़ी पहनी हुई थी। और साथ ही डीप नेक वाला ब्लाउज़ पहना हुआ था।
प्रतिमा मुस्कुराकर बोली – नमस्ते डॉक्टर साहब जी।
मैं – नमस्ते, कैसी हो प्रतिमा रानी?
प्रतिमा – मैं तो एकदम मस्त हूँ। सर जी, पर आपके इलाज के लिए मैं तड़प रही हूँ।
मैं – यार तड़प तो मैं भी कल से रहा हूँ।
प्रतिमा – तो फिर जल्दी से मेरा इलाज शुरू करो ना।
मैं – ठीक है जानेमन।
मैंने गेट को लॉक किया और पर्दा लगा लिया। फिर मैंने प्रतिमा को बेड पर लेटने को बोल दिया। प्रतिमा तो ऐसे बेड पर पैर खोल लेट गई, मानो वह जानो से चुदाई की प्यासी हो।
प्रतिमा अपनी बाँहें फैलाकर बोली – अब आ जाओ डॉक्टर साहब।
मैं – ठीक है, मैं आता हूँ।
मैंने जल्दी से उसकी साड़ी ऊपर करके देखा कि उसने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी। उसकी चूत एकदम क्लीन शेव थी। उसकी चूत पानी-पानी हो रही थी। मैंने पहले कॉटन से उसकी चूत को साफ़ किया और मैंने उसकी चूत की दरार में एक उँगली की, जिससे वह तड़प उठी। अब उसने मेरा लंड मेरी पैंट के ऊपर से ही पकड़ लिया था।
मैं – यार पहले मेरा लंड थोड़ा चूसो, फिर आगे का खेल खेलते हैं।
वह एकदम से तैयार हुई और एक रंडी की तरह मेरी पैंट और अंडरवियर उतारकर मेरा लंड चूसने लग गई। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। मेरा लंड चूस-चूसकर प्रतिमा ने मेरा लंड लोहे जैसा कर दिया था।
प्रतिमा – डॉक्टर साहब अब आ जाओ और मुझे अपने आगोश में ले लो। मैं काफ़ी समय से प्यासी भी हूँ। मेरे पति मेरे साथ सेक्स नहीं करते हैं। आज मुझे अपने आगोश में लेकर मेरी प्यास बुझा दो।
मैं – प्रतिमा डार्लिंग, अपनी साड़ी उतार दो।
प्रतिमा ने साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज़, ब्रा सब कुछ उतार दिया। अब वह मेरे सामने नंगी लेटी गई थी। मैंने अपने लंड पर थोड़ी-सी वैसलीन लगाई और प्रतिमा की दोनों टाँगें ऊपर उठाकर मैंने चूत के छेद पर लंड सेट किया। फिर मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा। प्रतिमा की ज़ोर से चीख निकल गई।
मैं कुछ पल शांत रहा और फिर मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। क़रीब 20 मिनट की ज़ोरदार चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गए और मैंने अपना सारा पानी उसकी चूत में निकाल दिया। प्रतिमा को इस बात पर से कोई दिक़्क़त नहीं थी, क्योंकि उसने मुझे बताया था कि वह गर्भ निरोधक गोली डेली लेती है। उसके बाद तो हम दोनों को जब भी मौका मिलता था। तभी मैं प्रतिमा के घर जाकर या कहीं और उसे बुलाकर उसकी चुदाई करता था। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी पर पढ़ रहे है.
ये Desi Doctor Porn की कहानी आपको कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताये…
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