Pahli Chudai
मेरी और स्नेहा की दोस्ती कोचिंग में हुई थी। तब से हम दोनों आपस में दोस्त बन गए थे। अभी हम दोनों एक ही क्लास में पढ़ाई कर रहे थे। वह एक अच्छे नेचर वाली लड़की थी और सबके साथ अच्छे से बात करती थी। कोचिंग में हम दोनों अक्सर एक ही टेबल पर बैठते थे, तो हम दोनों में काफी बातें हुआ करती थीं।
फिर एक दिन मैंने ही पहल करते हुए उससे नंबर एक्सचेंज करने को कहा, तो वह झट से मान गई। अब हम दोनों फोन पर बातें करने लगे। फिर एक दिन उसने मुझे अपनी छोटी बहन के बर्थडे की पार्टी का इनविटेशन दिया। मैं जब उसके घर गया तो उसके घरवालों ने भी मेरा अच्छे से वेलकम किया।
जो मुझे बहुत पसंद आया। उसकी फैमिली भी मुझे अपनी फैमिली की तरह खुले और अच्छे विचारों वाली लगी। बर्थडे पार्टी बहुत रात तक चली, फिर मैं अपनी बाइक से अपने घर वापस आ गया। अब हमारी दोस्ती और भी गहरी हो गई थी। इसी तरह समय बीत रहा था। अब मेरा बर्थडे भी आ गया था। मैंने उसे मूवी के लिए इनवाइट किया। तो वह खुशी-खुशी मान गई।
हम दोनों हॉलीवुड मूवी देखने गए। मूवी शुरू हुई और इस हॉट मूवी की शुरुआत में ही वह सीन आ गया। जिसे देखकर हम दोनों एक-दूसरे को तिरछी निगाहों से देखने लगे। कुछ ही पल बाद हम दोनों ने ही अपनी आँखें हटाईं और मूवी देखने लगे। फिर मूवी खत्म होते ही उसने मुझे एक गिफ्ट दिया, जिस पर मैंने उसे घर पर बर्थडे पार्टी में आने के लिए कह दिया।
वह – नहीं यार, रात को आने में प्रॉब्लम हो जाएगी। तो मैं अपने घरवालों से पूछकर तुम्हें बताऊँगी।
फिर हम दोनों घर के लिए निकल पड़े। घर आकर मैंने अपनी मॉम से सारी बात करी। तो उन्होंने मुझे कह दिया कि मैं अपनी फ्रेंड को इनवाइट कर सकता हूँ। फिर मैंने अपनी मॉम से उनकी मॉम को फोन करवाया और उसे मेरे घर आने की आसानी से परमिशन मिल गई।
वह शाम को केक कटिंग के कुछ देर पहले ही आ गई। फिर मैंने केक कटिंग के बाद डांस प्रोग्राम शुरू किया। अब सब मस्ती में डांस करने लगे। उधर हम दोनों भी साथ में डांस कर रहे थे। तो डांस करते समय मेरा हाथ गलती से उसके बूब्स को छू गया। जिसे शायद उसने इग्नोर कर दिया।
फिर रात ज्यादा होने की वजह से मेरी मॉम ने उसे मेरे घर पर ही रोक लिया और उसे सुबह जाने को कह दिया। उन दिनों गर्मियों के दिन थे, तो सबकी सोने की तैयारी हमने छत पर ही करी थी। फिर हम दोनों छत पर दो बिस्तर लगाकर लेट गए और बातें करने लगे।
मेरी कब आँख लग गई, मुझे पता ही नहीं चला। हम दोनों के बिस्तर बहुत ही पास लगे हुए थे, इसलिए रात के 2:30 बजे मेरा हाथ उसके सीने पर चला गया। मुझे कुछ गुदगुदा-सा एहसास आते ही मेरी नींद टूट गई, पर उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं थी।
मुझे उसके बूब्स बहुत ही सॉफ्ट लग रहे थे। मैं धीरे-धीरे उन पर हाथ फेर रहा था। तभी मुझे उसके बूब्स दबाने का आइडिया आया और मुझ पर थोड़ी-सी हवस भी हावी होने लगी। मैंने अब धीरे-धीरे उसके बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया। उसने इसका कोई विरोध नहीं किया।
अब मुझे समझ आ गया कि वह जाग रही थी और सोने का नाटक कर रही है। बस फिर क्या था, मैंने धीरे से उसके पलंग पर आ गया और मैंने उसका टॉप ऊपर करके उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। अगले ही पल मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
उससे भी अब रहा नहीं गया और अब वह मेरा साथ देने लगी। मैंने अब उठकर अपने सारे कपड़े उतार दिए। उसे भी मैंने सारे कपड़े उतारने का इशारा किया। उसके नंगी होते ही मैं उसके ऊपर आ गया और उसे ऊपर से नीचे तक किस करने लगा। अब वह बहुत गरम हो चुकी थी। ये कहानी आप फ्री XXX स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने उसकी चूत और अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाकर अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया। अब मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर एक जोरदार धक्का मारा। पहले ही शॉट ने मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। उसके मुँह से आह-आह की आवाज़ आई।
पर मैंने उसके होंठों को दबाया हुआ था। पर दर्द के कारण उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे। यह देखकर मैं थोड़ा रुका और फिर कुछ पलों बाद मैंने एक धक्का मारा। अब वह अधमरी-सी हो गई थी, क्योंकि उसे बहुत दर्द हो रहा था। मैं थोड़ी देर रुका रहा और मैं उसे किस करता रहा।
थोड़ी देर बाद वह नॉर्मल हो गई। तो अब मैंने लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। दर्द अभी भी उसे हो रहा था, पर अब उसे मज़ा आ रहा था। अब वह अपनी गाँड़ उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी। कुछ देर की चुदाई के बाद मैंने अपनी स्पीड तेज़ कर दी और कुछ देर बाद मेरे लंड से एक पिचकारी उसकी चूत में ही निकल गई।
अब मैं झड़ चुका था। उसने बताया कि इसी बीच वह भी झड़ चुकी थी। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हट गया, तो मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकल रहा था। मेरा लंड भी अब खून से सना हुआ था। फिर मैं छत पर पड़े एक कपड़े से अपने लंड को साफ करने लगा।
फिर मैंने उसकी चूत को साफ किया। और हम दोनों ने अपने कपड़े पहने। मैंने टाइम देखा तो सुबह के 4:30 बज चुके थे। फिर हम अपने-अपने बिस्तर पर सो गए। जब सुबह उठे तो उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। और उसने मॉम से कहा – आंटी, सीढ़ियों से उतरते हुए मेरा पैर मुड़ गया है।
चाय-नाश्ते के बाद मैंने उसे घर पर छोड़ा और उसके घरवालों को भी मैंने यही बताया। इसके बाद तो हम दोनों ने मौका पाते ही चुदाई का मज़ा लिया है। आज हम दोनों बी.ए. कर चुके हैं और आज उसकी शादी हो गई है। पर आज वह मेरे गाँव के पास ही रहती है।
मेरी Pahli Chudai की कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताये…